75+ Kharab Kismat Shayari उन जज़्बातों की आवाज़ है, जो दिल में तो गहरे उतर जाते हैं लेकिन लफ्ज़ों में आसानी से नहीं ढलते। ज़िंदगी में हर किसी का सामना ऐसे दौर से होता है जब मेहनत के बावजूद किस्मत साथ नहीं देती। कभी सपने अधूरे रह जाते हैं, कभी अपने ही पराये हो जाते हैं, और कभी हालात इंसान को अंदर तक तोड़ देते हैं। ऐसे ही पलों में शायरी दिल का सहारा बनती है।
इस खास कलेक्शन में आपको 75 से भी ज़्यादा बेहतरीन खराब किस्मत शायरी मिलेंगी, जो दर्द, तन्हाई, बेबसी और टूटी उम्मीदों को खूबसूरती से बयान करती हैं। ये शायरियां न सिर्फ आपके जज़्बातों को शब्द देंगी, बल्कि आपके दिल का बोझ भी हल्का करेंगी। अगर आप अपनी तकलीफ़ को सोशल मीडिया पर शेयर करना चाहते हैं या किसी खास को अपने दिल की बात बताना चाहते हैं, तो यहां आपको हर एहसास के लिए सही अल्फ़ाज़ मिलेंगे।
खराब किस्मत पर लिखी गई ये शायरी आपको एहसास कराएगी कि आप अकेले नहीं हैं। हर अंधेरी रात के बाद सुबह ज़रूर आती है और शायद यही उम्मीद इन लफ्ज़ों की असली ताकत है। 💔
Kharab Kismat Shayari

पता नहीं किस्मत me क्या चल रहा है
चेहरा हस रहा है or दिल रो रहा है
अकेले रहना to सीख गया हू पर
खुस रहना मे भूल गया हू
किस्मत me na सही dil me हमेसा रहोगी तुम
किस्मत or लोग मजबूर कर देते हैं
बदलने को वरना बदलना कौन चाहता है जनाब
जरूरी तो नहीं जो किस्मत मे नहीं उसे
छोड़ ही दिया जाए
कल किस्मत me खुसी आयी थी Sorry
बोल कर चली गई
ना अब वो दिन रहे और ना अब वो शौक,
किसी बेटे को बर्बाद करने se पहले
ये सोच लेना, माँ की बद्दुआ नशले बर्बाद कर देती है
mere पास to तुम्हारी यादे है… तुम्हारी
जिंदगी उनको मुबारक जिनकी किस्मत मे तुम हो
खराब किस्मत शायरी 2 लाइन

वो भी खुश हैं नए आगन मे तुलसी पूजकर
मे भी अपने कमरे के धुएँ me खुदको व्यस्त रखता हू
हक़ीक़त जान लो जुदा होने से पहले,
मेरी सुन लो अपनी सुनाने से पहले;
ये सोच लेना भुलाने से पहले,
बहुत रोयी हैं ये आँखें मुस्कुराने से पहले
सोचा था बहुत टूट कर चाहेंगे तुम्हें,
किस्मत तो देखो चाहा भी हमने और टूटे भी हम
तेरे चले जाने के बाद किस्मत ने इतने ग़म दिए की तेरे जाने का ग़म भी याद ना रहा
जब भी मुझे एहसास हुआ कि मैं तेरे लिए ख़ास हूँ, तेरी बेरुखी ने बता दिया कि मैं झूठी आस में हूँ
जहां बढ़ते थे वहा रौनक ला दिया करते थे…हालातों ne खोदी इस चेहरे की मुस्कान
कोई मुझे एकड़ दिखाए और मे
उसकी इज़्ज़त करती रहु किसी की इतनी भी अच्छी किस्मत नहीं है
कुछ रिस्तों se हम नहीं किस्मत हमे जुदा करती है
Kharab kismat shayari on life

मैं नफरत क्या करूँ मेरी लाइफ
से वो उसके भी लायक नहीं है
दिली तकलीफ के लिए आँखों मे
आंसू जरूरी तो नहीं
किसी को गलत मत समझो..
फिर चाहे किसी को समझो या ना समझो
Life me अगर सुकून चाहते हो तो focus अपने काम पर करो लोगों पर नहीं
चेहरे पर एक चेहरा लगाना भी पड़ता है मे ठीक हू मुस्कुराना भी पड़ता है
जो कुछ पलो के लिए पास होते हैं
जिंदगी me यही इंसास खास होते
ये जिन्दगी भी बहुत अजीब है रोज
नए नए रंग दिखाती है
जिंदगी से प्यार करो तो खूबसूरत हो जाती है खुशियों का इंतजार करो तो बदसूरती हो जाती….
नसीब का खेल शायरी

Jo नसीब me नहीं होता प्यार भी
उसी से ही होता है
जिंदगी तो नसीब वाले जीते हैं
हम to बस काट रहे हे
कमियां सब me होती है
मेंरे नसीब मे थोड़ी ज्यादा है
थक गया हू मे सम्भाल तें सम्भाल तें
जिंदगी ये बता दे कितने ग़म लिखे हैं मेर नसीब मे
मेरा नसीब हे या कोई बस स्टैंड
हर mod पर इंतजार लिखा है
नसीब कभी बुरा नहीं होता
अगर नियत अच्छी हो तो
खुस तो वो हे जो अपने नसीब से राजी हे
खुस वो नहीं जिनका नसीब अच्छा है
कुछ रिसते किराये के मकान की तरह होते हैं
उन्हें कितने भी सजा लो वो अपने नहीं होते
तकदीर किस्मत शायरी

जब ठिकाना ही तुम हो
तो खुसिया दुनिया मे और कहा ढूँढे
मज़े हम दोनों बराबर ले रहे हैं
कभी मे तकदीर का कभी
तकदीर मेरा
इश्क अधूरा, प्यार अधूरा, मोहब्बत भी अधूरी
फिर हो kese सकती तेरी मेरी कहानी पूरी
सब के सामने मजबूत बनी हुई स्त्री
तुम्हारे सामने रोने लगती है
सिर्फ और सिर्फ ये सोचकर कि तुम उसे
सम्भाल लोगे
हमेशा अचानक ही खुलती हैं…
तकदीर or सुबह की नीद
वक़्त भी साथ बढ़कर रोने लगा एक दिन
कहने लगा तू तो ठीक है बस मे ही खराब हू
यह दुनिया नहीं समझ पाएगी उस दर्द को
जिस मर्द से प्यार और तकदीर दोनों रूठी हुई हो
अपने ही हमदर्द को दर्द बनते देखा है मेने
बदलता वक़्त देखा है मेने
खराब किस्मत शायरी

खुद se ताल्लुक इतना कर लीजिए कि
ज़माने की यारी भारी ना पड़ने लगे
किस्मत or नसीब के सिवा इंसान
सब कुछ कॉपी कर सकता है
मेरी नसीब me नहीं है….
मेरी हर दुवा मे रहने वाला सख्स
आगे का इतना भी मत सोचो की
अब का मज़ा ना ले पावों
जाये कीजिए इंतजाम दोलत का
मोहब्बत बिकाऊ चीज़ हे जनाब
मेने अपनी खराब
किस्मत को माफ कर दिया
सारा अंजाम अपने सर ले कर
कौन कहता है कि आदमी अपनी
किस्मत खुद लिखता है
अगर ये सच है तो किस्मत मे
दर्द कौन लिखता है
मत करो हिसाब mere प्यार का
कहीं एसा ना हो कि बादमे कर्जदार तू ही निकले
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